Wednesday, 13 November 2019

बाल दिवस पर भाषण ,Children's Day

बाल दिवस पर भाषण

                 भारत में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन, 14 नवंबर, को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसे बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है । क्योंकि उन्हें बच्चों से बहुत प्रेम था । और बच्चे उन्हें चाचा नेहरू कह कर पुकारते थे। नेहरू कहते थे कि बच्चे देश का भविष्य है इसलिए ये जरूरी है कि उन्हें प्रेम दिया जाए और उनकी देखभाल की जाए जिससे वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें, बाल दिवस के दिन बच्चों को गिफ्ट्स दिए जाते हैं. स्कूलों में रंगारंग कार्यक्रमों आयोजित किया जाता हैं, साथ ही बच्चे विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं. स्कूलों में भाषण प्रतियोगिता होती है. इस बाल दिवस अगर आप भाषण (Children's Day Speech) देना चहाये तो कुछ नया भाषण दे।


                                                                   भाषण 

                   आदरणीय गुरुजनो और मेरे प्रिये साथियों को बाल दिवस की शुभकामनायें,                        बाल दिवस के अवसर पर में अपना व्याख्यान (भाषण) प्रस्तुत कर ने जा रहा हू्ॅ, अगर इस में कोई भी गलती हो तो क्षमा करें,
                     महफील सजाले तो शहंशाह क्या हैं,
                     दिल में वसाले तो दिवाने क्या हैं।
                     वो बचपन आज मिल जाये,
                     तो जीवन के फसाने क्या हैं।।
जैसा कि इस कविता से पता चल रहा है, की बचपन और बच्चे जीवन में कितना महत्व रखते हैं उसी महत्व को चाचा नेहरू हमेंसा सनझाते रहे हैं यही कारण है कि बच्चे आज चाचा जी के लिये ये गीत गाते हैं,


                     चाचा जी के हम हैं बच्चे प्यारे,

                   मां-बाप के हैं राज दुलारे,     
               जैसा की हमारे सभी साथी बता चुके है की बाल दिवस क्यों मनाया जाता है, बाल दिवस उत्सव का आयोजन देश के भविष्य के निर्माण में बच्चों के महत्व को बताता है। बच्चे राष्ट्र की बहुमूल्य सम्पत्ति होने के साथ ही भविष्य और कल की उम्मीद हैं, इसलिए उन्हें उचित देखरेख और प्यार मिलना चाहिए. हमारे देश में अभी भी काफी सारे बच्चे बाल मजदूरी में फंसे हैं और कुछ लोग अपने थोड़े से लाभ के लिए उनका शोषण कर रहे हैं. वास्तव में बाल दिवस का अर्थ पूर्ण रुप से तब तक सार्थक नहीं हो सकता, जब तक हमारे देश में हर बच्चे को उसके मौलिक बाल अधिकारों की प्राप्ति ना हो जाए। भले ही बच्चों के भलाई और बाल अधिकारों के लिए सरकार द्वारा कई सारी योजनाएं क्यों ना चलायी जा रही हों पर उन तक उनका लाभ नहीं पहुंच पा रहा है, ऐसे में बाल दिवस के अवसर पर हम सब को मिलकर बाल अधिकारों के प्रति जागरुकता फैलानी चाहिए। इसी पर में दो शब्द कहुगा-
                                  बचपन का उन्हें खुमार मिलना चाहिये,
                                  फूल ये बागों में रहमत से खिलना चाहिये,
                                  कोई बच्चा ना बन जाये मजदूर किसी घर में,
                                  ये फैसला सब कि सहमत से होना चाहिये,
                   जय हिन्द, जय भारत