Wednesday, 13 November 2019

बाल दिवस पर भाषण ,Children's Day

बाल दिवस पर भाषण

                 भारत में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन, 14 नवंबर, को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसे बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है । क्योंकि उन्हें बच्चों से बहुत प्रेम था । और बच्चे उन्हें चाचा नेहरू कह कर पुकारते थे। नेहरू कहते थे कि बच्चे देश का भविष्य है इसलिए ये जरूरी है कि उन्हें प्रेम दिया जाए और उनकी देखभाल की जाए जिससे वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें, बाल दिवस के दिन बच्चों को गिफ्ट्स दिए जाते हैं. स्कूलों में रंगारंग कार्यक्रमों आयोजित किया जाता हैं, साथ ही बच्चे विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं. स्कूलों में भाषण प्रतियोगिता होती है. इस बाल दिवस अगर आप भाषण (Children's Day Speech) देना चहाये तो कुछ नया भाषण दे।


                                                                   भाषण 

                   आदरणीय गुरुजनो और मेरे प्रिये साथियों को बाल दिवस की शुभकामनायें,                        बाल दिवस के अवसर पर में अपना व्याख्यान (भाषण) प्रस्तुत कर ने जा रहा हू्ॅ, अगर इस में कोई भी गलती हो तो क्षमा करें,
                     महफील सजाले तो शहंशाह क्या हैं,
                     दिल में वसाले तो दिवाने क्या हैं।
                     वो बचपन आज मिल जाये,
                     तो जीवन के फसाने क्या हैं।।
जैसा कि इस कविता से पता चल रहा है, की बचपन और बच्चे जीवन में कितना महत्व रखते हैं उसी महत्व को चाचा नेहरू हमेंसा सनझाते रहे हैं यही कारण है कि बच्चे आज चाचा जी के लिये ये गीत गाते हैं,


                     चाचा जी के हम हैं बच्चे प्यारे,

                   मां-बाप के हैं राज दुलारे,     
               जैसा की हमारे सभी साथी बता चुके है की बाल दिवस क्यों मनाया जाता है, बाल दिवस उत्सव का आयोजन देश के भविष्य के निर्माण में बच्चों के महत्व को बताता है। बच्चे राष्ट्र की बहुमूल्य सम्पत्ति होने के साथ ही भविष्य और कल की उम्मीद हैं, इसलिए उन्हें उचित देखरेख और प्यार मिलना चाहिए. हमारे देश में अभी भी काफी सारे बच्चे बाल मजदूरी में फंसे हैं और कुछ लोग अपने थोड़े से लाभ के लिए उनका शोषण कर रहे हैं. वास्तव में बाल दिवस का अर्थ पूर्ण रुप से तब तक सार्थक नहीं हो सकता, जब तक हमारे देश में हर बच्चे को उसके मौलिक बाल अधिकारों की प्राप्ति ना हो जाए। भले ही बच्चों के भलाई और बाल अधिकारों के लिए सरकार द्वारा कई सारी योजनाएं क्यों ना चलायी जा रही हों पर उन तक उनका लाभ नहीं पहुंच पा रहा है, ऐसे में बाल दिवस के अवसर पर हम सब को मिलकर बाल अधिकारों के प्रति जागरुकता फैलानी चाहिए। इसी पर में दो शब्द कहुगा-
                                  बचपन का उन्हें खुमार मिलना चाहिये,
                                  फूल ये बागों में रहमत से खिलना चाहिये,
                                  कोई बच्चा ना बन जाये मजदूर किसी घर में,
                                  ये फैसला सब कि सहमत से होना चाहिये,
                   जय हिन्द, जय भारत

Saturday, 14 September 2019

हिंदी दिवस पर दें ये भाषण

हिंदी दिवस पर दें ये भाषण

आदरणीय मुख्य अतिथि, शिक्षकों और मेरे मित्रों को नमस्कार
मैं हिंदी दिवस के महत्व पर कुछ शब्द कहने के उपस्थित हुआ/ 
 हिंदी दिवस हर साल 14 सितंबर को देश भर में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. हिंदी ने हमें दुनियाभर में पहचान दिलाई है.  भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के कई देशों में हिंदी बोली जाती है. हिंदी विश्व की प्राचीन, समृद्ध और सरल भाषा है. राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी ने हिंदी को जनमानस की भाषा कहा था. उन्‍होंने 1918 में आयोजित हिंदी साहित्‍य सम्‍मेलन में हिंदी को राष्‍ट्र भाषा बनाने के लिए कहा था. भारत सालों तक अंग्रेजों का गुलाम  रहा. इसी वजह से उस गुलामी का असर लंबे समय तक देखने को मिला. यहां तक कि इसका प्रभाव भाषा में भी पड़ा. वैसे तो हिंदी दुनिया की तीसरी ऐसी भाषा है जिसे सबसे ज्‍यादा लोग बोलते हैं लेकिन इसके बावजूद हिंदी को अपने ही देश में हीन भावना से देखा जाता है. आमतौर पर हिंदी बोलने वाले को पिछड़ा और अंग्रेजी में अपनी बात कहने वाले को आधुनिक कहा जाता है. इसे हिंदी का दुर्भाग्‍य ही कहा जाएगा कि इतनी समृद्ध भाषा कोष होने के बावजूद आज हिंदी लिखते और बोलते वक्‍त ज्‍यादातर अंग्रेजी भाषा के शब्‍दों का इस्‍तेमाल किया जाता है. और तो और हिंदी के कई शब्‍द चलन से ही हट गए. ऐसे में हिंदी दिवस को मनाना जरूरी है ताकि लोगों को यह याद रहे कि हिंदी उनकी राजभाषा है और उसका सम्‍मन व प्रचार-प्रसार करना उनका कर्तव्‍य है. हिंदी दिवस मनाने के पीछे मंशा यही है कि लोगों को एहसास दिलाया जा सके कि जब तक वे इसका इस्‍तेमाल नहीं करेंगे तब तक इस भाषा का विकास नहीं होगा. 

कुछ खास बातें


1. भारतीय युवा Youtube पर 93% विफियो हिंदी में देखते है

2. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीयो के स्मार्टफोन मे औसतन 20 मे से 9 APP हिंदी के हैं

3. हिंदी कंटेंट की मांग करीब 94% की दर से बढ़ रही है, जबकि अंग्रेजी कंटेंट की मांग इससे काफी कम है

4. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा तैयार पावर लैंग्वेज इंडेक्स के मुताबिक वर्ष 2050 तक हिंदी दुनिया की ताकतवर भाषाओं में से एक होगी


5. दुनियाभर में लगभग 176 विश्वविद्यालय ऐसे हैं जहां हिंदी पढ़ाई जाती है। उनमें से 45 विश्वविद्यालय अमेरिका के हैं

   जय हिन्द .......

                          जय भारत............


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Sunday, 25 August 2019

RRB Group D


केंद्रीय रोजगार सूचना (CEN) नं। RRC-01/2019 (7 वीं सीपीसी पे मैट्रिक्स के स्तर 1 में विभिन्न पदों के लिए भर्ती) प्रकाशन की तारीख 23.02.2019 12.03.2019 को 17.00 बजे ऑनलाइन पंजीकरण का उद्घाटन। आवेदन पत्र 12.04.2019 के ऑनलाइन पंजीकरण का समापन 23.59 बजे। आवेदन शुल्क के भुगतान के लिए अंतिम तिथि और समय: (a) ऑनलाइन (नेट बैंकिंग / क्रेडिट कार्ड / डेबिट कार्ड / UPI) 23.04.2019 को 23.59 बजे। (b) SBI चालान 18.04.2019 को 13.00 बजे। (c) डाकघर चालान 18.04.2019 को 13.00 बजे। आवेदन पत्र 23.04.2019 को 23.59 बजे अंतिम रूप से जमा करना। कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) टेंटेटिव शेड्यूल सितंबर-अक्टूबर 2019 नोट: 1. विस्तृत CEN- RRC-01/2019 अपलोड किया जाएगा और ऑनलाइन पंजीकरण और आवेदन के लिए लिंक इस CEN के पैरा 21.0 (ए) में उल्लिखित RRB की आधिकारिक वेबसाइटों पर लाइव होगा। 2. सीबीटी और भर्ती के अन्य चरणों के लिए तिथि समय-समय पर वेबसाइटों के माध्यम से सूचित की जाएगी रेलवे भर्ती कक्ष (आरआरसी) इस सीईएन के पैरा 21.0 (बी) में सूचीबद्ध हैं। आरआरबी की ओर से पात्र भारतीय नागरिकों और अन्य नागरिकों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं जैसा कि विभिन्न इकाइयों में 7 वें सीपीसी पे मैट्रिक्स के स्तर 1 में विभिन्न पदों के लिए इस सीईएन के पैरा 4 पर लाया गया है भारतीय रेलवे का। सभी तरह से पूर्ण होने वाले आवेदनों को चुने गए रेलवे को ऑनलाइन जमा किया जाना चाहिए भर्ती बोर्ड 26.04.2019 के 23.59 बजे तक। एक आनंद पर रिक्तियां का विवरण विभिन्न पदों के लिए रेलवे वार सारांशों को तत्काल संदर्भ के लिए नीचे प्रस्तुत किया गया है। आगे की, विभिन्न पदों के पैरामीटर (योग्यता, चिकित्सा मानक और PwBD आदि के लिए पद की उपयुक्तता) CEN में एनेक्सर A और रेलवे शामिल है और सभी अधिसूचित पदों के लिए पद वार रिक्ति है अनुलग्नक बी। हालांकि, रेलवे के पास इस आकलन को संशोधित करने का अधिकार सुरक्षित है।

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Tuesday, 13 August 2019

रक्षाबन्धन

रक्षाबन्धन 

रक्षाबन्धन एक हिन्दू और जैन त्योहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु
 से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है।
 रक्षाबंधन भाई बहन के रिश्ते का प्रसिद्ध त्योहार है, रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब
 बाध्य है।रक्षाबंधन के दिन बहने भगवान से अपने भाईयों की तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना 
करती है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी
 लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है। कभी-कभी
 सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बाँधी जाती है। रक्षाबंधन के दिन
 बाजार मे कई सारे उपहार बिकते है, उपहार और नए कपड़े खरीदने के लिए बाज़ार मे लोगों की सुबह
 से शाम तक भीड होती है। घर मे मेहमानों का आना जाना रहता है। रक्षाबंधन के दिन भाई अपने 
बहन को राखी के बदले कुछ उपहार देते है। रक्षाबंधन एक ऐसा त्योहार है जो भाई बहन के प्यार 
को और मजबूत बनाता है, इस त्योहार के दिन सभी परिवार एक हो जाते है और राखी, उपहार और
 मिठाई देकर अपना प्यार साझा करते है।
अब तो प्रकृति संरक्षण हेतु वृक्षों को राखी बाँधने की परम्परा भी प्रारम्भ हो गयी है

रक्षा बंधन 2019 कहानियां

अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिये हर बहन रक्षा बंधन के दिन का इंतजार करती है। 
 यदि इसकी शुरुआत के बारे में देखें तो यह भाई-बहन का त्यौहार नहीं बल्कि विजय प्राप्ति
 के किया गया रक्षा बंधन है। भविष्य पुराण के अनुसार जो कथा मिलती है वह इस प्रकार है।
बहुत समय पहले की बाद है देवताओं और असुरों में युद्ध छिड़ा हुआ था लगातार 12 साल
 तक युद्ध चलता रहा और अंतत: असुरों ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर देवराज इंद्र के
 सिंहासन सहित तीनों लोकों को जीत लिया। इसके बाद इंद्र देवताओं के गुरु, ग्रह बृहस्पति 
के पास के गये और सलाह मांगी। बृहस्पति ने इन्हें मंत्रोच्चारण के साथ रक्षा विधान करने को 
कहा। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन गुरू बृहस्पति ने रक्षा विधान संस्कार आरंभ किया। 
इस रक्षा विधान के दौरान मंत्रोच्चारण से रक्षा पोटली को मजबूत किया गया। पूजा के बाद
 इस पोटली को देवराज इंद्र की पत्नी शचि जिन्हें इंद्राणी भी कहा जाता है ने इस रक्षा पोटली के
 देवराज इंद्र के दाहिने हाथ पर बांधा। इसकी ताकत से ही देवराज इंद्र असुरों को हराने और अपना
 खोया राज्य वापस पाने में कामयाब हुए।
वर्तमान में यह त्यौहार बहन-भाई के प्यार का पर्याय बन चुका है, कहा जा सकता है कि यह
 भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और गहरा करने वाला पर्व है। एक ओर जहां भाई-बहन के 
प्रति अपने दायित्व निभाने का वचन बहन को देता है, तो दूसरी ओर बहन भी भाई की लंबी
 उम्र के लिये उपवास रखती है। इस दिन भाई की कलाई पर जो राखी बहन बांधती है 
वह सिर्फ रेशम की डोर या धागा मात्र नहीं होती बल्कि वह बहन-भाई के अटूट और पवित्र
 प्रेम का बंधन और रक्षा पोटली जैसी शक्ति भी उस साधारण से नजर आने वाले धागे में
निहित होती  है /

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Saturday, 10 August 2019

राष्ट्र-प्रेम/15 अगस्त special (2019)


राष्ट्र-प्रेम

राष्ट्र-प्रेम का अर्थ है, सबसे पहले किसी के लिए भी उसके देश के प्रति हित होना उसके विकास के लिए पूर्ण रूप से योगदान देना और फिर जरूरत पड़ने पर देश लिए बलिदान देना / किसी भी व्यक्ति का देश के प्रति अमुल्य प्रेम और भक्ति, देशभक्ति कि भावना को परिभाषित करती है। जो लोग सच्चे देशभक्त होते हैं, वे अपने देश के प्रति और उसके निर्माण के लिए कुछ भी कर सकते हैं। 

प्रसिद्ध भारतीय देशभक्त

 ब्रिटिश शासनकाल के दौरान कुछ सच्चे देशभक्त-

  1. शहीद भगत सिंह
भगत सिंह जी को एक सच्चा देशभक्त  है। उन्होंने हमारे देश को ब्रिटिश सरकार के गुलामी से मुक्त कराने के लिए स्वतंत्रता संग्रामों में भाग लिया और एक क्रांति शुरू कर दे। वे अपने मिशन के प्रति इतने समर्पित थे कि उन्होंने मातृभूमि के प्रति अपने प्राण त्यागने से पहले एक बार भी नहीं सोचा। वे कई नागरिकों के लिए एक प्रेरणा साबित हुए।
  1. सुभाष चंद्र बोस
सुभाष चंद्र बोस जी को नेताजी के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने भारत को अंग्रेज सरकार के गुलामी से मुक्त कराने के लिए स्वतंत्रता संग्राम में मुख्य भूमिका निभाई और वे अपने मजबूत विचारधाराओं के लिए जाने जाते है। विभिन्न स्वतंत्रता आंदोलनों का हिस्सा होने के अलावा बोस जी अंग्रेजों को देश से बाहर निकालने में अन्य सेनानियों का भी साथ दिये, बोस जी ने हिंदू-मुस्लिम की एकता को भी बढ़ावा दिया।
  1. बाल गंगा धर तिलक

बाल गंगा धर तिलक जी देशभक्ति की भावना से जुड़े हुए थे। उनका कहना था कि, “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा” इससे यह निर्धारित होता है कि वे कैसे ब्रिटिश शासकों के अत्याचारों से देश को मुक्त करने में सक्षम थे। तिलक जी ब्रिटिश सरकार के क्रूर व्यवहार की निंदा करते हुए भारत के नागरिकों के लिए स्वयं सरकार के अधिकार की मांग की।
  1. मोहनदास करमचन्द गांधी
भारत में स्वतंत्रता संग्राम के प्रति उनका योगदान सभी के द्वारा जाना जाता है कि कैसे उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अनेक स्वतंत्रता आंदोलनों का नेतृत्व किया है। वे "सादा जीवन उच्च विचार" के एक आदर्श उदाहरण है। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता का सपना देखा और उसे अद्वितीय तरीके से इसे प्राप्त करने की दिशा में कड़ी मेहनत की।

5. रानी लक्ष्मीबाई

रानी लक्ष्मीबाई (जन्म: 19 नवम्बर 1828[1] – मृत्यु: 18 जून 1858) मराठा शासित झाँसीराज्य की रानी और [[१८५७ की द्वितीय शहीद वीरांगना (प्रथम शहीद वीरांगना रानी अवन्ति बाई लोधी 20 मार्च 1858 हैं) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम 1857 के भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]] की वीरांगना थीं। उन्होंने सिर्फ़ 23 साल की उम्र में अंग्रेज़ साम्राज्य की सेना से जद्दोजहद की और रणभूमि में वे वीरगति को प्राप्त हुईं  

6.सरोजनी नायडू

अपने समय की एक प्रसिद्ध गायिका सरोजिनी नायडू जी भी दिल से एक देशभक्त थी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और देश को ब्रिटिश शासन से मुक्त करने की दिशा में अपना योगदान भी  दिया। इन्होंने नागरिक अवज्ञा आंदोलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसके कारण उन्हें अन्य प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान फिर से इन्हें गिरफ्तार किया गया, परन्तु फिर भी इनके दिल से देशभक्ति की भावना नहीं मिटी//

                          जय हिन्द .......

                          जय भारत............


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Tuesday, 6 August 2019

सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में निधन

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में निधन


पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का निधन हो गया है। भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज को गंभीर हालत में एम्स में भर्ती कराया गया था। सुषमा स्वराज की हालत काफी नाज़ुक बनी हुई थी। स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन, नितिन गडकरी अस्पताल पहुंच चुके हैं। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी एम्स के लिए रवाना हो गए हैं। बता दें सुषमा स्वराज की तबियत काफी लंबे समय से खराब बनी हुई थी।


पिछले कुछ सालों से उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही थी, इसी वजह से उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। 2016 में एम्स में ही उनका किडनी प्रतिरोपण हुआ था।सुषमा स्वराज ने करीब तीन घंटे पहले ही आर्टिकल 370 हटने के बाद ट्वीट किया था।

विदेशों में रह रहे भारतीयों को जब कभी भी परेशानी हुई है तब-तब सुषमा स्‍वराज ने मदद का हाथ बढ़ाया है। सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 में अम्बाला में हुआ था। राजनीति में आने से पहले सुषमा स्वराज ने सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के पद पर भी काम किया।

साल 2014 में बीजेपी के सत्‍ता में आने के बाद सुषमा स्‍वराज को विदेशमंत्री का पद सौंपा गया। इस पद को संभालने के बाद से ही जब कभी भी विदेश में रह रहे किसी भारतीय को मदद की जरूरत पड़ी, सुषमा स्‍वराज ने हर मुमकिन कोशिश की। उन्‍होंने कई बार विदेशों में फंसे भारतीयों को सकुशल घर वापसी कराई


खास बातें


  • पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का निधन, दिल का दौरा पड़ने के बाद अचेतावस्था में लाई गई थीं एम्स।
  • 10 घंटे पहले आखिरी ट्वीट- जिंदगी भर इस दिन की प्रतीक्षा कर रही थी।
  • अंतिम संस्कार आज, पीएम मोदी ने कहा- करोड़ों लोगों की प्रेरणास्रोत।
  • जनता पार्टी से राजनीति में आईं, अटल से मोदी सरकार तक चार बार मंत्री रहीं।
  • सुषमा टि्वटर पर 1.31 करोड़ फॉलोअर्स के साथ दुनिया की सबसे चर्चित महिला नेता थी।

सुषमा के अंतिम दर्शन कर भावुक हुए मोदी, अमित शाह-सोनिया ने भी दी श्रद्धांजलि

थोड़ी देर में पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि देने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके आवास पर पहुंचेंगे। उनका पार्थिव शरीर सुबह 11 बजे से दोपहर 1.00 बजे तक भाजपा के केंद्रीय कार्यालय में दर्शन के लिए रखा जाएगा। 

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Saturday, 27 July 2019

विज्ञापन की दुनिया

विज्ञापन क्या है

किसी उत्पाद अथवा सेवा को बेचने अथवा प्रवर्तित करने के उद्देश्य से किया जाने वाला जनसंचार विज्ञापन कहलाता है। विज्ञापन विक्रय कला का एक नियंत्रित जनसंचार माध्यम है जिसके द्वारा उपभोक्ता को दृश्य एवं श्रव्य सूचना इस उद्देश्य से प्रदान की जाती है कि वह विज्ञापनकर्ता की इच्छा से विचार सहमति, कार्य अथवा व्यवहार करने लगे।
औद्योगिकीकरण आज विकास का पर्याय बन गया है। उत्पादन बढ़ने के कारण यह आवश्यक हो गया है कि उत्पादित वस्तुओ को उपभोक्ता तक पहुँचाया ही नहीं जाय बल्कि उसे उस वस्तु की जानकारी की दी जाय। वस्तुतः मनुष्य को जिन वस्तुओ की आवश्यकता होती है व उन्हें तलाश ही लेता इसके ठीक विपरीत उसे जिसकी जरूरत नहीं होती वह उसके बारे में सुनकर अपना समय खराब नहीं करना चाहता। इस अर्थ में विज्ञापन वस्तुओ को ऐसे लोगों तक पहुँचाने का कार्य करता है जो यह मान चुके होते है कि उन वस्तुआें की उसे कोई जरूरत नहीं है। आशय यह कि उत्पादित वस्तु को लोकप्रिय बनाने तथा उसकी आवश्यकता महसूस कराने का कार्य विज्ञापन करता है।
विज्ञापन अपने छोटे से संरचना में बहुत कुछ समाये होते है। वह बहुत कम बोलकर भी बहुत कुछ कह जाते है। आज विज्ञापन हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलते ही चाय की चुस्की के साथ अखबार में सबसे पहले दृष्टि विज्ञापन पर ही जाती है। घर के बाहर पैर रखते ही हम विज्ञापन की दुनिया से घिर जाते है। चाय की दुकान से लेकर वाहनों और दिवारों तक हर जगह विज्ञापन ही विज्ञापन दिखाई देते हैं।
किसी भी तथ्य को यदि बार-बार लगातार दोहराया जाये तो वह सत्य प्रतीत होने लगता है - यह विचार ही विज्ञापनों का आधारभूत तत्व है। विज्ञापन जानकारी भी प्रदान करते है। उदाहरण के लिए कोई भी वस्तु जब बाजार में आती है, उसके रूप - रंग - सरंचना व गुण की जानकारी विज्ञापनों के माध्यम से ही मिलती है। जिसके कारण ही उपभोक्ता को सही और गलत की पहचान होती है। इसलिए विज्ञापन हमारे लिए जरूरी है।
जहाँ तक उपभोक्ता वस्तुओं का सवाल है, विज्ञापनों का मूल उद्देश्य ग्राहको के अवचेतन मन पर छाप छोड़ जाता है और विज्ञापन इसमें सफल भी होते है। यह 'कहीं पे निगाहें, कही पे निशाना' का सा अन्दाज है।
विज्ञापन सन्देश आमतौर पर प्रायोजकों द्वारा भुगतान किया है और विभिन्न माध्यमों के द्वारा देखा जाता है जैसे समाचार पत्र, पत्रिकाओं, टीवी विज्ञापन, रेडियो विज्ञापन, आउटडोर विज्ञापन, ब्लॉग या वेब्साइट आदि। वाणिज्यिक विज्ञापनदाता अक्सर उपभोक्ताओं के मन में कुछ गुणों के साथ एक उत्पाद का नाम या छवि जोड़ जाते हैं जिसे हम "ब्रान्डिग" कहते है। ब्रान्डिग उत्पाद या सेवा की बिक्री बढाने में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। गैर-वाणिज्यिक विज्ञापनों का उपयोग राजनीतिक दल, हित समूह, धार्मिक संगठन और सरकारी एजेंसियाँ करतीं हैं।
2015 में पूरे विश्व में विज्ञापन पर कोई 529 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किये जाने का अनुमान है। [1]

अंधो के शहर में आईने बिक रहे है
विज्ञापन की दुनिया का कमाल देखो

करोड़ो की मर्सिडीज से चलने वाला अमिताभ बताता है कि स्कूटर कौन सा अच्छा है..😁

कभी बाइक लेकर सर्विस सेंटर नही गया धोनी ये बताता है कि आपकी बाइक के लिये कौन सा इंजन ऑइल सही रहेगा...😁

जिसने कभी किचन में जा कर एक कप चाय न बनाई हो वो करिश्मा आपको बताती है कौनसे  आटे की रोटी अच्छी बनती है...😁

सबसे मजेदार बात गंजे पति की पत्नी जूही चावला सबको ये समझा रही है कौनसे तेल से बाल बढ़ते है ....😁

जो मोदी अपनी बीबी को नहीं रख सका वो बेटी बचाओ अभियान चला रहा है ....😁               


अमित शाह जिसका खुद दो क्विंटल वज़न है वो लोगों को योगा के फायदे बता रहा है ....😁        ‌ 


साध्वी प्राची साध्वी होते हुए चार बच्चे पैदा करने की सलाह दे रही है ...


 रामदेव जिसने एक चूहिया भी पैदा नहीं कि वो दो बच्चों की पाॅलिसी बनाने की बात कह रहा है...


 जिस देश में घी जलाया जाता हो, दूध बहाया जाता हो और मूत्र पीने की सलाह दी जाती हो ,उस देश का भविष्य क्या होगा आप खुद ही सोचें !!



'आज अंधों की तकदीर बहरे लिख रहे हैं !!
घोडो को मिल नहीं रहीं हैं घास और गधे खा रहे हैं चवनप्राश'
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Tuesday, 23 July 2019

KAISE KARE SCHOLARSHIP KE LIYE ONLINE ,छात्र क्या करें - ( UP Scholarship 2019) छात्रों हेतु महत्वपूर्ण निर्देश

छात्रों हेतु महत्वपूर्ण निर्देश

   छात्र क्या करें-

1• छात्रों हेतु आनलाइन आवेदन पत्र भरने से पूर्व अपने शैक्षिक योग्यता के अंकपत्र/प्रमाण पत्र, जाति/आय प्रमाण पत्र (आनलाइन जारी), बैंक पासबुक, शिक्षण संस्थान में जमा की गयी शुल्क की रसीद, पाठ्यक्रम की अनिवार्य वार्षिक नान रिफण्डेबिल शुल्क धनराशि, वर्तमान विश्वविद्यालय/बोर्ड का अपना पंजीयन क्रमांक, आधार नम्बर, अपना पासपोर्ट साइज का फोटो आदि अभिलेख अपने पास एकत्रित कर लें।
2• छात्र अपना आवेदन आनलाइन करने के पश्चात एवं फाइनल सबमिट करने से पूर्व अपना सम्पूर्ण विवरण यथा- हाईस्कूल/इण्टरमीडियट का रोल नम्बर, जाति/आय प्रमाण-पत्र का क्रमांक, छात्र द्वारा गत परीक्षा में प्राप्त अंकों का विवरण, वर्तमान पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने की न्यूनतम योग्यता, पाठ्यक्रम एवं पाठ्यक्रम का प्रकार, आय प्रमाण-पत्र में अंकित आय, बैंक शाखा का नाम, आई0एफ0एस0 कोड एवं खाता संख्या, अनुमोदित वार्षिक शुल्क की धनराशि, आवेदन पत्र में अंकित की गयी कैटेगरी (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामान्य वर्ग, पिछडा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग) आदि का किया गया अंकन सावधानीपूर्वक जांच कर लें तदोपरान्त ही छात्र अपने आवेदन पत्र को फाइनल सबमिट करें।
3• सभी छात्र अपना आवेदन पत्र स्वयं भरें। आनलाइन आवेदन पत्र के लिये पासवर्ड स्वयं सृजित करें। छात्र यदि साइबर कैफे/संस्था से आवेदन कर रहे हैं तो अपने सामने ही सभी प्रविष्टियों को आवेदन पत्र में भरवायें एवं जांच का प्रिन्ट लेकर स्वयं समस्त प्रविष्टियों की जांच कर लें तथा यदि कोई त्रुटि है तो उसको सुधार करने के उपरान्त ही आवेदन पत्र को आनलाइन सबमिट करें।
4• आवेदन पत्र सबमिट करने के उपरान्त तीन दिन बाद संस्था हेतु फाइनल प्रिन्ट ले सकेंगें, यदि आवेदन पत्र में जाति/आय प्रमाण-पत्र क्रमांक, आय, आधार नम्बर तथा हाईस्कूल/इण्टरमीडियट के रोल नम्बर में कोई त्रुटि होगी तो उसे इन तीन दिनों में आपकी लागिन पर प्रदर्शित किया जायेगा। सही करने के उपरान्त ही आवेदन पत्र शिक्षण संस्थान को सबमिट (Submit) करने हेतु फाइनल प्रिन्ट लें एवं संस्थान से आवेदन पत्र जमा करने की पावती अवश्य लें।
5• अनिवार्य वार्षिक शुल्क (Non Refundable fees) के कालम में शिक्षण संस्थान से जानकारी करने के बाद ही वास्तविक फीस की धनराशि ही अंकित करें।
6• आवेदन पत्र भरने के लिये (01 जुलाई 2019 से प्रारम्भ) निर्धारित अन्तिम तिथि (कक्षा 11-12 एवं अन्य उच्च कक्षाओं हेतु 10 अक्टूबर 2019 तक) से पूर्व ही प्रत्येक दशा में आवेदन पत्र भरना एवं सबमिट करना सुनिश्चित करें एवं हार्ड कापी समस्त संलग्नकों सहित संस्था में जमा करना सुनिश्चित कर लें एवं प्राप्ति रसीद अवश्य प्राप्त कर लें।
7• बचत बैंक खाता संख्या (CBS) एवं IFSC कोड को भलीभांति जांच लें। बचत बैंक खाता संख्या एवं IFSC कोड भरने में जीरो (0) और ओ (O) अक्षर को विशेष ध्यान से भरें। अपनी बैंक शाखा का सही रूप से चयन करें। गलत बैंक शाखा/खाता संख्या भरने पर पी0एफ0एम0एस0 के माध्यम से आपका आवेदन रिजेक्ट हो जायेगा। यह भी ध्यान रखें कि आपका खाता संख्या 11 (ग्यारह) अंकों से कम का न हो। खाता संख्या 11 अंकों से कम अंकों का होने पर सम्बन्धित बैंक शाखा से सम्पर्क करें।
8• अपने आवेदन पत्र की हार्ड कापी के साथ बचत बैंक खाते की पासबुक की छाया प्रति अवश्य संलग्न करें।
9• छात्र प्रथम वर्ष में धनराशि न मिलने पर भी पूर्व आवेदन पत्र का अगली कक्षा में नवीनीकरण ही करें, न कि नवीन आवेदन पत्र भरें। छात्रों को नवीनीकरण हेतु आवेदन पत्र की कुछ अनिवार्य प्रविष्टियों को ही भरना है जिसमें विगत परीक्षा के प्राप्तांक, पूर्णांक, अनिवार्य वार्षिक नान रिफण्डेबिल (Non refundable) फीस, मोबाइल नम्बर, वर्तमान विश्वविद्यालय/बोर्ड का अपना पंजीयन क्रमांक, आधार नम्बर, बचत बैंक खाता संख्या व IFSC कोड आदि भरना होगा। नवीनीकरण हेतु पात्र छात्र आवेदन पत्र में विगत कक्षा के प्राप्तांक को सही भरें क्योंकि अंकों का मिलान विश्वविद्यालय द्वारा अपलोड किये गये परीक्षाफल से किया जायेगा।
10• सभी निजी क्षेत्र के संस्थानों में पाठ्यक्रम का प्रकार स्ववित्त पोषित ही रहेगा। शासकीय (GOVT) एवं शासकीय सहायता प्राप्त (AIDED) संस्थानों में पाठ्यक्रम, पाठ्यक्रम के प्रकार (नियमित (Regular)/स्ववित्त पोषित SELF FINANCE व उसके वर्ष का अंकन सही-सही ध्यानपूर्वक करें। छात्र/छात्रा विगत वर्ष में प्राप्त छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि का अंकन अवश्य करें।
11• छात्र/छात्रा मोबाइल नम्बर एवं ई-मेल आईडी स्वयं की ही दें।
12• वर्तमान सत्र हेतु प्रचलित नियमावली, समय-सारिणी, प्रदर्शित सूचनायें एवं अन्य विस्तृत जानकारी हेतु https://scholarship.up.nic.in पर समय-समय पर सर्च करें एवं वेबसाइट पर निरन्तर प्रदर्शित हो रहे आवश्यक निर्देशों का भली-भांति पालन करें एवं समय-सारिणी में दी गयी समयावधि का उल्लघंन कदापि न करें अन्यथा आप छात्रवृत्ति एवं शुल्क पाने से वंचित हो सकते हैं।

  

  छात्र क्या न करें-

1• शिक्षण संस्था में जमा करने के लिये आवेदन पत्र किसी अन्य व्यक्ति को न सौंपे। शिक्षण संस्थान में स्वयं जमा करें एवं पावती रसीद अवश्य प्राप्त कर लें।
2• अपने व्यक्तिगत विवरण/अभिलेख यथा-हाईस्कूल का अनुक्रमांक व बैंक खाता संख्या तथा आवेदन हेतु सृजित पासवर्ड किसी से भी साझा (Share) न करें।
3• आवेदन पत्र भरने की अन्तिम तिथि का इन्तजार न करें।
4• अनुत्तीर्ण (Fail) छात्र किसी भी दशा में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति हेतु आवेदन न करें।
5• शिक्षण संस्थान में जमा करने हेतु आवेदन पत्र का फाइनल प्रिन्ट आउट बिना निकाले आवेदन पत्र भरा हुआ नहीं माना जायेगा। समय-सारिणी में निर्धारित समयावधि में संशोधन करने के उपरान्त भी संस्थान में जमा करने हेतु संशोधित फाइनल प्रिन्ट निकाल कर संस्था में जमा करने एवं संस्था द्वारा अग्रसारित करने के उपरान्त ही संशोधित आवेदन पत्र मान्य होगा।
6• छात्र/छात्रा द्वारा आवेदन पत्र में त्रुटिपूर्ण/अपूर्ण/गलत प्रविष्टियां भरने पर पूर्ण उत्तरदायित्व छात्र/छात्रा का ही होगा एवं आवेदन पत्र निरस्त हो जायेगा तथा छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति अनुमन्य नहीं होगी।
7• यदि आपका डाटा सन्देहास्पद श्रेणी में आ जाता है तो सन्देह के कारण का उत्तर साक्ष्यों सहित अपनी संस्था के माध्यम से तत्काल जनपद स्तरीय अधिकारियों (जिला समाज कल्याण अधिकारी/जिला पिछडा वर्ग कल्याण अधिकारी/जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी) को संस्थान के माध्यम से छात्रवृत्ति वेबसाइट पर प्रदर्शित निर्धारित समयावधि में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। यदि सन्देहास्पद डाटा का अभिलेखों सहित उत्तर निर्धारित समयावधि में प्राप्त नहीं होता है तथा दिये गये उत्तर/अभिलेखों से छात्र के सही होने के दावे की पुष्टि नहीं होती है तो जनपदीय अधिकारियों द्वारा जनपदीय छात्रवृत्ति स्वीकृति समिति से निर्णय प्राप्त करते हुये डाटा डिजिटल हस्ताक्षर से अस्वीकृत (REJECT) कर दिया जायेगा।

चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण सफल- अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंचा, देशभर में खुशी की लहर..

 चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण सफल, 

 # भारत के लिए आज बेहद खास दिन है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-2 को लॉन्च कर इतिहास रच दिया है। चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) को लेकर 'बाहुबली' रॉकेट (GSLV MK-3) दोपहर 2.43 मिनट पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रवाना हुआ। रॉकेट ने चंद्रयान-2 को अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंचा दिया है। चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग को लेकर सतीश धवन स्पेस सेंटर में मौजूद वैज्ञानिकों में खुशी की लहर है।

चंद्रयान-2 की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग पर इसरो के चीफ के सिवन ने कहा कि हमने चंद्रयान-2 की तकनीकी दिक्कत दूर कर इस मिशन को अंतरिक्ष में भेजा। इसकी लॉन्चिंग हमारी सोच से भी बेहतर हुई है। चांद की तरफ भारत की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत हुई। चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। उन्होंने कहा कि अभी टास्क खत्म नहीं हुआ है। हमें अपने अगले मिशन पर लगना है।

इसरो की तरफ से कहा गया है कि अभी रॉकेट की गति बिल्कुल सामान्य है। सब कुछ प्लानिंग के हिसाब से ही चल रहा है। दोनों एस- 200 रॉकेट्स चंद्रयान-2 से अलग हो गए हैं।

इसरो के मुताबिक चंद्रयान-2 की लैंडिंग के अखिरी के 15 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होंगे, जब लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला होगा। उन्होंने कहा कि मिशन पूरी तरह से कामयाब सबित होगा और चंद्रमा पर नई चीजों की खोज करने में सफल रहेगा।
परीक्षा विशेष-

         चंद्रयान-2 


चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने की जिम्मेदारी इसरो ने अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल- मार्क 3 (जीएसएलवी-एमके 3) को दी थी। इस रॉकेट को स्थानीय मीडिया से 'बाहुबली' नाम मिला। 640 टन वजनी रॉकेट की लागत 375 करोड़ रुपये है।

इस रॉकेट ने 3.8 टन वजन वाले चंद्रयान-2 को लेकर उड़ान भरी। चंद्रयान-2 की कुल लागत 603 करोड़ रुपये है। अलग-अलग चरणों में सफर पूरा करते हुए यान सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव की निर्धारित जगह पर उतरेगा। अब तक विश्व के केवल तीन देशों अमेरिका, रूस व चीन ने चांद पर अपना यान उतारा है। 2008 में भारत ने चंद्रयान-1 लॉन्च किया था। यह एक ऑर्बिटर अभियान था।
चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं-ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर। अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के सम्मान में लैंडर का नाम विक्रम रखा गया है। रोवर का नाम प्रज्ञान है, जो संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ज्ञान। चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद लैंडर-रोवर अपने ऑर्बिटर से अलग हो जाएंगे। लैंडर विक्रम सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव के नजदीक उतरेगा। लैंडर उतरने के बाद रोवर उससे अलग होकर अन्य प्रयोगों को अंजाम देगा। लैंडर और रोवर के काम करने की कुल अवधि 14 दिन की है। चांद के हिसाब से यह एक दिन की अवधि होगी। वहीं ऑर्बिटर सालभर चांद की परिक्रमा करते हुए विभिन्न प्रयोगों को अंजाम देगा।

धन्यवाद