बंदे है हम उरई के
हम्पे किसका जोर
मच्छर चौराहें पे. पुलिस खङी हो तो
निकल जाते है बाज़ारिया की ओरसिर्फ हमारा उरई
वो गर्मीयो की शाम,
ओर वो घण्टाघर * का"जाम"
.
वो रेल्वे स्टेशन की "हवा",
ओर वो डॉक्टर चंद्रा की "दवा"
वो चूड़ीवाली गली की"शाँपींग"
ओर कालपी बस स्टैन्ङ कि"हिटिंग"
वो *माहिल तालाब * का नजारा
ओर वो छूटन चाट वाला हमारा
ओर वो लालमन की जलेबी
वो पीलीकोठी वाली पुरानी हवेली
ओर वो *गोपी का "पान"
वो इंसानो का व्यवहार
ओर आप सभी कर रहे हैं "विचार"
वो तुलसीनगर की "छोरीया "
और वो "बाँके की कचोरीया "
वो " मोहन " की कड़क "चाय"
ओर वो * बच्चाराम* कि पूरी सब्ज़ी क्यूँ ना खाए"
वो उरई के "नजारे"
ओर वो *मन्दिर की हमारे
वो *बाज़ारिया * की "सडके"
जहा ना जाने कितने दिल "धडके"
वो मस्ती से भरी "यादें"
ऐसी है कुछ हमारे उरईकी बातें
😊😀😊😀😊😀
उरई वालो से नाता हो तो आगे FORWARD करो




Orai ki Shan Vivek jan
ReplyDeleteO yes
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